Jan 27, 2026

एक साल बाद उत्तराखंड में यूसीसी कानून और मजबूत

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उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुए एक साल वक्त कल यानी 27 जनवरी को पूरा हो रहा है। 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुआ था। उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद यूसीसी नियमावली में कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। इसी क्रम में धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से हाल ही में भेजे गए यूसीसी संशोधन प्रस्ताव को राजभवन से मंजूरी मिल गई है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार की ओर से इस संशोधन को अध्यादेश के जरिए लागू किया जाएगा। 

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता कानून लागू किया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद समय-समय पर परिस्थितियों और कानून के मौजूद कुछ कमियों को दूर करने के लिए संशोधन किया गया। इसी क्रम में पिछले साल यानी अगस्त 2025 को यूसीसी में संशोधन किए जाने को लेकर प्रस्ताव लोकभवन (राजभवन) भेजा गया था, लेकिन प्रस्ताव में कुछ तकनीकी त्रुटियां होने के चलते लोकभवन ने यूसीसी संशोधन प्रस्ताव को 18 दिसंबर 2025 को वापस लौटा दिया था। इसके बाद उन कमियों को दूर करते हुए यूसीसी संशोधन प्रस्ताव को 15 जनवरी को हुई मंत्रिमंडल के सम्मुख रखा गया, जिस पर मंत्रिमंडल ने अध्यादेश के जरिए आवश्यक संशोधन की मंजूरी दे दी थी। इस संशोधन प्रस्ताव को धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से राज्यपाल की मंजूरी के लिए लोक भवन भेजा गया था। आज 26 जनवरी को यूसीसी के संशोधन प्रस्ताव पर राज्यपाल ने मोहर लगा दी है। समान नागरिक संहिता कानून में किए गए संशोधन के तहत अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी भी यूसीसी के रजिस्ट्रार जनरल बन सकेंगे। यही नहीं पहचान छुपा कर शादी करने पर शादी को अमान्य घोषित किए जाने संबंधित बिंदु को भी यूसीसी में शामिल किया गया है। इसके अलावा यूसीसी के सब रजिस्ट्रार को भी अपील का अधिकार दे दिया गया है। समान नागरिक संहिता में किए गए संशोधन के अनुसार 27 जनवरी 2025 से पहले और 27 मार्च 2010 के बीच हुई शादियों के रजिस्ट्रेशन के लिए यूसीसी लागू होने के बाद अगले 6 महीने का समय दिया गया था। 

ऐसे में राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 से पहले हुई शादियों को 6 माह के बजाए एक साल में विवाह रजिस्ट्रेशन कराने प्रावधान किया है। इसके साथ ही यूसीसी में रजिस्ट्रार जनरल के लिए पहले न्यूनतम सचिव लेवल के अधिकारी को नियुक्त करने का प्रावधान था, जिसे अब बदलकर न्यूनतम अपर सचिव लेवल के अधिकारी कर दिया गया है, यानी अब अपर सचिव लेवल के अधिकारी भी यूसीसी के रजिस्ट्रार जनरल बन सकेंगे। इसके साथ ही यूसीसी में प्रावधान था कि अगर सब रजिस्ट्रार समय से काम नहीं करते हैं तो यूसीसी नियमावली में सब रजिस्ट्रार पर फाइन लगाने का प्रावधान किया गया था, जबकि फाइन न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही लगाया जा सकता है, जिसको देखते हुए यूसीसी नियमावली में फाइन शब्द को हटाकर उसकी जगह पेनल्टी शब्द लिखने का निर्णय लिया गया है। यही नहीं सब रजिस्ट्रार को भी अपील का अधिकार दे दिया गया है, जबकि अभी तक ये अधिकार रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल को ही था। इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड में मुख्य रूप से एक महत्वपूर्ण बिंदु में संशोधन किया गया है, जिसके तहत अब पहचान छुपाकर शादी करने पर उस शादी को अमान्य घोषित किया जा सकेगा,जबकि पहले पहचान छुपाकर शादी करने पर उस शादी को अमान्य करने का कोई प्रावधान नहीं था। लिहाजा, यूसीसी संशोधन के जरिए नियमावली में इस बिंदु को भी शामिल कर दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर शादी करता है तो उस शादी को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।  हालांकि, शादी को अमान्य करने की प्रक्रिया न्यायालय के माध्यम से होगा। लेकिन यूसीसी नियमावली में इस बिंदु को भी शामिल कर दिया गया है।